जौनपुर : कभी चलाते थे ऑटो रिक्शा, अब लाखों को देते हैं शिक्षा #NayaSabera

  • जौनपुर के दुर्गेश जायसवाल से यूट्यूब के जरिए पढ़ते है लाखों लोग
  • इनके पढ़ाए कई शिष्यों को मिल चुकी है सरकारी नौकरी
अंकित जायसवाल
जौनपुर।

सूरज की तपिश और बेमौसम बरसात को हमने हंस कर झेला है
मुसीबतों से भरे दलदल में हमने अपनी जिंदगी को धंस कर ठेला है
यूं ही नहीं कदम चूम रही है सफलता आज इस खुले आसमान तले
जमाने भर के नामों को पीछे छोड़ा है तब जाकर हमारा नाम फैला है.... 
किसी शायर की लिखी यह पंक्तियां कभी ऑटो रिक्शा चलाने वाले दुर्गेश जायसवाल पर बिल्कुल सटीक बैठती है। इन्होंने अपने संघर्ष और शिक्षा के प्रति लगन से 10 वर्षों में अपने कैरियर को उस शिखर पर ले गये जहां वह सोचे भी नहीं थे। आज दुर्गेश अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा की बदौलत लाखों लोगों को ऑनलाइन पढ़ा रहे है। इतना ही नहीं इनके पढ़ाए दर्जनों लोग शिक्षक हो गये तो वहीं कुछ लोग पुलिस विभाग में आरक्षी, कम्प्यूटर ऑपरेटर हो गये। बहुत सारे छात्रों ने टीडी कालेज में होने वाली इंट्रेस परीक्षा में टॉप किया है। दुर्गेश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाते है।
कभी लोन पर ऑटो रिक्शा निकालकर यात्रियों को मड़ियाहूं से जौनपुर और जौनपुर से मड़ियाहूं पहुंचाने वाले मड़ियाहूं तहसील क्षेत्र के गहोरा रामदयालगंज निवासी अशोक कुमार जायसवाल के बड़े पुत्र दुर्गेश जायसवाल ने सोचा भी नहीं था कि उनकी मेहनत उन्हें सफलता के इस शिखर पर पहुंचा देगी जहां वह लाखों लोगों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाएंगे। कभी प्रतिदिन 300 से 400 रुपये कमाने वाला ऑटो रिक्शा चालक आज एक सफल अध्यापक के रुप में अपना और अपने परिवार का जीवन यापन शानो शौकत से कर रहा है। दुर्गेश का यूट्यूब पर ई-लर्निंग विथ दुर्गेश के नाम से चैनल है जिसे 1 लाख 31 हजार लोगों ने सबस्क्राइब किया हुआ है। यूटयूब ही उन्हें डॉलर में धनराशि भेजता है तो वहीं वह पेड क्लास के जरिए भी अच्छी खासी कमाई कर रहे है।

बचपन में ही पिता हो गये बीमार
वर्ष 2002-03 में पिता अशोक छत्तीसगढ़ के भिलाई में सब्जी का ठेला लेकर फेरी किया करते थे जिससे परिवार का भरण पोषण चलता था। तीन बच्चों को वह जैसे-जैसे पढ़ा लिखा रहे थे। दुर्गेश जब कक्षा 3 में तब पापा के यहां जाया करते थे वहां भी लोगों ने उन्हें कहा कि जब पढ़ रहे हो तो यहां क्यों आते हो? इसका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। समय बीतता गया। वर्ष 2008 में दुर्गेश जब जूनियर हाईस्कूल में तो उनके पिता बीमार हो गये। तीन चार महीने तक वह बेड पर रहे। उनके इलाज में काफी पैसे खर्च हो गये जिसके चलते परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। घर में बड़े होने के चलते परिवार को इस संकट को उबारने के लिए दुर्गेश ने काफी संघर्ष किया और अपने जन्मदिन के ठीक दो दिन बाद यानि 10 जून 2010 को लोन पर ऑटो रिक्शा (यूपी 62 टी 4417) निकाला। जौनपुर से मड़ियाहूं और मड़ियाहूं से जौनपुर के यात्रियों को वह गंतव्य तक छोड़ने लगे जिससे 300, 400 रुपये प्रतिदिन मिलने लगा। इंटरमीडिएट के बाद आर्थिक संकट की वजह से उन्होंने बीच में पढ़ाई थी छोड़ दी थी।

इस घटना ने पढ़ाई के प्रति किया प्रेरितदुर्गेश बताते हैं कि एक बार जब वह ऑटो रिक्शा लेकर मड़ियाहूं जा रहे थे उसी दौरान यूपी पुलिस की परीक्षा देकर आये कुछ विद्यार्थी उनकी ऑटो रिक्शा में बैठकर जा रहे थे। उन्होंने पूछा कि आप लोग पेपर दिखा सकते है तो किसी ने कहा कि तुम्हारे बस की बात नहीं लेकिन फिर भी उन्होंने जिद करके पेपर देखा और गणित के प्रश्न के हल वह बताने लगे। यह देख परीक्षार्थी हतप्रभ रह गये। इसके बाद दुर्गेश ने ठाना कि वह दो जून की रोटी नहीं खाएंगे लेकिन पहले अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे। इसके बाद उन्होंने टीडी कालेज से बीए किया और उसके साथ ही अपने घर पर कुछ बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने लगे।

समय बदला, ऑनलाइन कोचिंग पढ़ाकर बदल ली तकदीरदुर्गेश ने पढ़ाई के दौरान हाईस्कूल रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा क्वालीफाई की लेकिन फिजिकल के लिए नहीं गये। इसके बाद 2014 में दो बार एसएससी 10 प्लस 2, एसएससी की प्री एक्जाम पास कर लिया लेकिन टाइपिंग टेस्ट में फेल हो गये। वर्ष 2015 में सीपीओ (सेंट्रल पुलिस आर्गनाइजेशन) एसआई की परीक्षा पास तो कि लेकिन अंग्रेजी होने की वजह से 8 से 10 सितम्बर तक होने वाले मेडिकल परीक्षा में नहीं गये। 2016-17 में एमपी पीसीएस प्री पास, मेंस निकाला लेकिन किन्हीं कारणवश लिस्ट में नाम नहीं आया। यूपीएससी आईएएस मेंस की परीक्षा में बैठे लेकिन यहां भी असफलता ही हाथ लगी। थक हाकर 2016-18 में जौनपुर डायट से बीटीसी में दाखिला लिया। इसी दौरान 2017 में उन्होंने शिक्षा से जुड़ा पहला वीडियो यूट्यूब पर शेयर किया जिसके बाद लोगों ने खूब मजाक उड़ाया लेकिन यहां पर भी वह खुद को मोटिवेट करते रहे और आज के समय में उनके यूट्यूब पर 1 लाख 31 हजार सबस्क्राइबर है और लाखों लोग इनके वीडियो से शिक्षा ग्रहण कर रहे है। 

दुर्गेश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाते है। इनके पढ़ाए हुए न जाने कितने लोग शिक्षक, सरकारी नौकरियों में हैं। वह अब पेड क्लास भी चलाते है जिससे अब एक सफल जीवन यापन कर रहे हैं। दुर्गेश ने बताया कि यूट्यूब के शुरुआती दौर में शिक्षिका ज्योति ने भी उनका बहुत सहयोग किया।


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7 comments:

  1. Super sir I salute you...
    I never met with durgesh sir but whenever I had a question durgesh sir guided me..

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  2. बेमिसाल,,नायाब,, बेहतरीन,, बहुत हसीन,, सादगी,,बहुत अजीमो-शान शख्सियत के सरताज है आप,, आपके संघर्ष को सलाम

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